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Shrangar Nritya

श्रृंगार नृत्य – बुंदेलखंड

श्रृंगार नृत्य बुंदेलखंड की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक परंपराओं में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह नृत्य मुख्यतः श्रृंगार रस (प्रेम, सौंदर्य और आकर्षण) को अभिव्यक्त करता है और भावनात्मक अभिव्यक्ति के लिए जाना जाता है।


🔸 परिचय

श्रृंगार नृत्य बुंदेलखंड क्षेत्र का एक पारंपरिक लोक नृत्य है, जिसमें प्रेम, सौंदर्य, साज-सज्जा और मानवीय भावनाओं को नृत्य और गीतों के माध्यम से दर्शाया जाता है।


🔸 प्रमुख विशेषताएँ

  • यह नृत्य भाव-प्रधान (expressive) होता है
  • इसमें प्रेम, विरह (separation), मिलन (union) जैसे भाव प्रमुख होते हैं
  • नृत्य के साथ मधुर लोकगीत गाए जाते हैं
  • कलाकार चेहरे के हाव-भाव (facial expressions) और हाथों की मुद्राओं से भाव व्यक्त करते हैं

🔸 कौन करता है?

  • मुख्यतः महिलाएँ और युवतियाँ
  • कुछ अवसरों पर पुरुष कलाकार भी भाग लेते हैं
  • समूह में या जोड़ी (pair) में प्रस्तुत किया जाता है

🔸 कब किया जाता है?

यह नृत्य विशेष अवसरों और उत्सवों में किया जाता है, जैसे:

  • विवाह समारोह
  • पारंपरिक लोक उत्सव
  • सांस्कृतिक कार्यक्रम

🔸 वेशभूषा और सजावट

  • पारंपरिक लहंगा-चुनरी / साड़ी
  • गहने (चूड़ियाँ, पायल, हार)
  • मेकअप और श्रृंगार पर विशेष ध्यान
  • रंग-बिरंगे वस्त्र, जो नृत्य के “श्रृंगार” भाव को और उभारते हैं

🔸 सांस्कृतिक महत्व

श्रृंगार नृत्य:

  • बुंदेलखंड की लोक-भावनाओं और जीवनशैली को दर्शाता है
  • प्रेम और सौंदर्य की अभिव्यक्ति का माध्यम है
  • लोकगीत और नृत्य के माध्यम से परंपराओं को जीवित रखता है

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